नज़रें पढ़ो हमारी और जानो रज़ा क्या हैं

नज़रें पढ़ो हमारी और जानो रज़ा क्या हैं…?
अब अग़र हर बात लफ़्ज़ों में हो,
तो फिर मज़ा क्या हैं…!!

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